छुट्टा सांड बना काल! किसान तेजबहादुर साहनी की सींगों के हमले में दर्दनाक मौत

पहले भी कई लोगों को घायल कर चुका था सांड, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप; आक्रोशित ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर किया चक्का जाम

रुद्रपुर (देवरिया)। रुद्रपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सभा पिडरा में बुधवार सुबह छुट्टा सांड के हमले में 54 वर्षीय किसान तेजबहादुर साहनी पुत्र रमाशंकर साहनी की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जाता है कि खेत की ओर जाते समय सांड ने उन पर अचानक हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

        घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया। नाराज ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त सांड पहले भी कई लोगों पर जानलेवा हमला कर चुका था। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा उसे पकड़ने अथवा सुरक्षित स्थान पर भेजने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों के अनुसार सांड के हमले में पहले रामसकल यादव घायल हो चुके हैं, जबकि दिनानाथ यादव के सीने में गंभीर चोट आई थी। रामसूचित यादव को कमर के पीछे गंभीर चोट लगने के कारण आठ टांके लगवाने पड़े थे। वहीं गामा यादव की एक आंख सांड के हमले में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि इन घटनाओं के बाद कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायत अधिकारियों से की गई। यहां तक कि जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता का ही परिणाम है कि आज एक किसान की जान चली गई।

इसी बीच घटना से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल बताए जा रहे इस ऑडियो में एक व्यक्ति द्वारा घटना से पूर्व संबंधित अधिकारियों को फोन कर सांड के आतंक, कई ग्रामीणों के घायल होने तथा कार्रवाई की आवश्यकता की जानकारी दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और बीएनवाई न्यूज़ इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता। स्थानीय स्तर पर लोग इस ऑडियो को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं। मृतक अपने पीछे पत्नी अनार काली, पुत्री अंजू तथा तीन पुत्र शिव कुमार, सिकंदर और मिथुन को छोड़ गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी अवधेश निगम, थानाप्रभारी कल्याण सिंह सागर तथा नायब तहसीलदार अनिल तिवारी मौके पर पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। ग्रामीण पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, उचित मुआवजा तथा छुट्टा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान की मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक चले प्रदर्शन और वार्ता के बाद अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई एवं शासन स्तर पर सहायता दिलाने का आश्वासन दिए जाने पर चक्का जाम समाप्त हुआ। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि छुट्टा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्र में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यह दर्दनाक घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं से बढ़ते खतरे और शिकायतों के प्रभावी निस्तारण की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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