शास्त्रीय संगीत की सुरलहरियों के बीच संपन्न हुई ग्रीष्मकालीन गायन वादन कार्यशाला

नाद प्रवाह अभियान के तहत दो सप्ताह तक चला प्रशिक्षण, प्रतिभागियों ने प्रस्तुत की मनमोहक सांगीतिक झलकियां

राणाप्रताप सिंह

देवरिया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ एवं पं. ठाकुर चौबे संगीताश्रम, सुमिला देवी ललित कला अकादमी, देवरिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘नाद प्रवाह’ अंतर्गत ग्रीष्मकालीन शास्त्रीय गायन वादन कार्यशाला का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा समापन अवसर पर अपनी सांगीतिक प्रतिभा का प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों की सराहना अर्जित की।
कार्यशाला में प्रशिक्षक श्री नित्यानंद यादव ने विद्यार्थियों को रागों की बारीकियां, स्वर साधना, आलाप, तान एवं शास्त्रीय गायन की तकनीकी विशेषताओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। दो सप्ताह तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है तथा ऐसी कार्यशालाएं नई पीढ़ी को संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का कार्य करती हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल सांगीतिक भविष्य की कामना की गई। आयोजकों ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘नाद प्रवाह’ जैसे अभियान जनपद में संगीत एवं कला के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समापन समारोह में अरूण कुमार बरनवाल, राजेन्द्र जायसवाल, अखिलेन्द्र शाही, राणाप्रताप सिंह, डॉ0 रविकांत मणि त्रिपाठी, रामप्रवेश भारती, संजय कुमार यादव सहित संगीत प्रेमियों, अभिभावकों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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