न्यायालय के आदेशों की अनदेखी का आरोप, दर्जनों महिला-पुरुष आंदोलन में शामिल
रूद्रपुर (देवरिया)। भूमि विवादों में न्यायालय के आदेशों की कथित अनदेखी, प्रशासनिक उदासीनता और भू-माफियाओं के दबाव से क्षुब्ध पीड़ित परिवारों ने सोमवार को तहसील परिसर में धरना शुरू कर दिया। धरने में दर्जनों की संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए तथा तहसील प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत और प्रार्थना पत्र देने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ग्राम कृतपुरा निवासी तहसीलदार निषाद ने आरोप लगाया कि कुकुरिहां स्थित भूमि विवाद में न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद विपक्षी पक्ष द्वारा कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार तहसील दिवस एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि दबंग तत्व लगातार दबाव बना रहे हैं, जिससे उनका परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करने को विवश है।
वहीं ग्राम डहरौली बुजुर्ग निवासी 72 वर्षीय व्यास मुनि शुक्ल ने आरोप लगाया कि उनकी आराजी संख्या-265 से संबंधित मामले में सिविल न्यायालय द्वारा निषेधाज्ञा आदेश पारित होने के बावजूद राजस्व कर्मियों की मौजूदगी में उनकी भूमि पर जबरन पिलर गाड़कर कब्जे का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उपजिलाधिकारी और जिलाधिकारी को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर भूमि पर अतिक्रमण कराने की कोशिश की गई है।
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने तहसील प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए और कथित भू-माफियाओं पर कार्रवाई की मांग की। धरनारत लोगों ने शासन-प्रशासन से न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने, अवैध कब्जे के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की। पीड़ितों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। सोमवार को तहसील परिसर में शुरू हुए इस धरने और नारेबाजी को लेकर दिनभर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।


