शिव-विवाह प्रसंग के माध्यम से धर्म, त्याग और आदर्श जीवन मूल्यों का दिया संदेश
राणाप्रताप सिंह
रुद्रपुर (देवरिया)। श्री दुग्धेश्वरनाथ तीर्थ सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित रुद्रेश्वर महादेव, कालभैरव एवं बटुक भैरव प्राण-प्रतिष्ठा महायज्ञ के अंतर्गत चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन शनिवार को शिव-विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार, भजनों और जयघोषों के बीच श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर दिखाई दिए।
कथा व्यास पंडित वीरेन्द्र तिवारी ने भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव का जीवन सादगी, त्याग और सहजता का प्रतीक है, जबकि माता पार्वती का तप, धैर्य और समर्पण मानव जीवन को प्रेरणा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि शिव जैसा सरल जीवन और पार्वती जैसा समर्पण ही सुखी एवं सफल जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य बाहरी आडंबरों और भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, जबकि जीवन की वास्तविक सुख-शांति संस्कार, सेवा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने में निहित है। शिव-विवाह प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि सच्चा प्रेम, विश्वास और समर्पण जीवन के हर संबंध को मजबूत बनाता है। कथा के दौरान उन्होंने माता पार्वती की कठोर तपस्या और उनके अटूट संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छा शक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा से व्यक्ति जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को भी पार कर सकता है। शिव-विवाह प्रसंग के दौरान कथा पंडाल हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर कथा का आनंद लेते रहे। इस अवसर पर मुख्य यजमान डॉ. एस.पी. त्रिपाठी, आचार्य आदित्य पाण्डेय, अरविंद पाण्डेय, आयोजक मंडल सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे।


