संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी, माता-पिता और गुरु सेवा से मिलता है सच्चा पुण्य : पंडित वीरेन्द्र तिवारी
राणाप्रताप सिंह
रुद्रपुर (देवरिया)। श्री दुग्धेश्वरनाथ तीर्थ सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित रुद्रेश्वर महादेव, कालभैरव एवं बटुक भैरव प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के अंतर्गत सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का शुभारंभ शुक्रवार को श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण के बीच हुआ। कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य अतिथि दंत चिकित्सक डॉ. एस.के. शाही ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जबकि मुख्य यजमान डॉ. एस.पी. त्रिपाठी ने विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन एवं वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराया।
कथा व्यास भोजपुरी कथा सम्राट पंडित वीरेन्द्र तिवारी ने प्रथम दिवस पर भगवान शिव द्वारा श्रीराम चरित्र की महिमा वर्णित “रचि महेश निज मानस राखा, पाई सुसमय शिवा सन भाषा” प्रसंग का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने अपने मानस में श्रीराम के दिव्य चरित्र को धारण किया और उचित समय आने पर माता पार्वती को उसका वर्णन किया। श्रीराम कथा मनुष्य को धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन का मार्ग दिखाती है। उन्होंने “भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा, तिन्हहि राम पद अति अनुरागा” चौपाई का भावपूर्ण वर्णन करते हुए महर्षि भरद्वाज के जीवन एवं प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा एवं मानव जीवन में धार्मिक संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कथा के प्रथम दिवस पंडित वीरेन्द्र तिवारी ने कहा कि संस्कार मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं होता तथा गुरु की सेवा व्यक्ति के जीवन को नई दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में माता-पिता, गुरु एवं धर्म का सम्मान होता है, वहां सदैव सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है। कथा के दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष एवं भक्ति रस से गुंजायमान रहा तथा श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे। इस अवसर पर महंत रमाशंकर भारती, महातम पाण्डेय, आनन्द सिंह, राणाप्रताप सिंह, संजय कुमार यादव, राकेश यादव, डॉ. राजेश सिंह, शिवहरि तिवारी, अरविंद पाण्डेय सहित भारी संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे।


