टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का जोरदार प्रदर्शन, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

पूर्व सेवारत शिक्षकों के सेवा अधिकारों की सुरक्षा की मांग, हजारों शिक्षकों ने जिला मुख्यालय पर बुलंद की आवाज

राणाप्रतापसिंह

देवरिया। पूर्व सेवारत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, देवरिया के बैनर तले गुरुवार को जिला मुख्यालय पर शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री भारत सरकार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी देवरिया के माध्यम से प्रेषित किया गया।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों ने एक स्वर में मांग उठाई कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा अन्य सेवा लाभों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि आवश्यक होने पर सरकार अथवा संसद इस वर्ग के हितों की रक्षा हेतु उपयुक्त विधायी एवं नीतिगत प्रावधान करे।
इस अवसर पर जिला संयोजक जयशिव प्रताप चंद ने कहा कि देश और प्रदेश के हजारों शिक्षक वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनकी नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमों एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप हुई थीं। ऐसे में बाद में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने सरकार से शिक्षक समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए न्यायसंगत समाधान निकालने की मांग की। जिला सह संयोजक विवेक मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों के सेवा अधिकारों और भविष्य को लेकर व्याप्त असमंजस को शीघ्र समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता और योगदान को महत्व देते हुए उनके वैधानिक हितों की रक्षा की जानी चाहिए। कोर समिति सदस्य गोविन्द सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों का मनोबल ऊंचा रहना बेहद आवश्यक है। वहीं आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि पूर्व में विधिवत नियुक्त शिक्षकों के अर्जित सेवा अधिकारों का संरक्षण संविधान की भावना और प्राकृतिक न्याय के अनुरूप है। कोर समिति सदस्य शशांक मिश्रा ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार को शिक्षक समुदाय की न्यायोचित मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। महासंघ पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार शिक्षक समुदाय की भावनाओं को समझते हुए न्यायपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लेंगी तथा पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करेंगी। कार्यक्रम में जिला कोर समिति एवं विभिन्न ब्लॉकों के पदाधिकारियों सहित हजारों की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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